राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास संस्थान (आरजीएनआईवाईडी) में आज  मुख्य शैक्षिक अधिकारी

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श्रीपेरुम्बुदूर 9 जनरवरी 2018 -  राजीव गांधी राष्ट्रीय युवा विकास संस्थान (आरजीएनआईवाईडी) में आज  मुख्य शैक्षिक अधिकारी, कांचिपुरम के द्वारा स्कूल के बच्चों के लिए आत्महत्या और नशा की रोकथाम पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

 

उद्घाटन के संबोधन में प्रोफेसर मदन मोहन गोयल, निदेशक, आरजीएनआईवाईएडी ने तीन मुख्य जैसे सहपाठी दबाव, किशोर अपरिपक्वता और गैर-जिम्मेदाराना पर्वरिश जो बच्चों को नशे की लत और दुख की जिंदगी और आत्महत्याओं की ओर दखेलती है पर रोशनी डाली।

 

 आत्महत्या को नकारने के लिए, हमें याद रखना और समझना होगा कि आत्मा अजर- अमर है और इसका मृत्यु दर शून्य है। प्रोफेसर गोयल ने कहा कि भौतिक शरीर के रूप में सभी को मरना है और मौत की दर 100 प्रतिशत, जो कि वास्तविक भी है।

 

 प्रोफेसर गोयल के अनुसार, नशीली दवाओं का दुरुपयोग एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है जो हर तरह के हर समुदाय और परिवार को किसी न किसी तरह प्रभावित करती है। नशीली दवाओं का सेवन कई प्रमुख सामाजिक समस्याओं, जैसे ड्रग ड्राइविंग, हिंसा, तनाव और बाल दुर्व्यवहार आदि को जन्म देता है। नशीली दवाओं के दुरुपयोग से बेघर, अपराध और काम से हटाये जाने जैसी नौबत आ सकती है या नौकरी बनाए रखने में समस्याएं हो सकती हैं। यह अजन्म्र शिशुओं को नुकसान पहुंचाता है और परिवारों को नष्ट कर देता है।

 

निदेशक आरजीएनआईवाईडी का मानना है कि  नशीली दवाओं से मुक्ति के लिए विभिन्न प्रकार के उपचार हैं, लेकिन सबसे बेहतर उपाय उसके प्रथम सेवन से बचना है जिस पर जानकारी इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य है।